27 Dec 2020

2. तुम आओगी

तुम आओगी 
जब नैन तुम्हारे भीगेंगे
एहशास पुराने जागेंगे।।।
प्यार पुराना चीखेगा
मर्म मेरा तुम जनोगी
तुम आओगी

गोधुल  वक्त कुछ बोलेगा
आवेगों को पकड़ोगी
सब्र तुम्हारा फूटेगा
जब धैर्य तुम्हारा टूटेगा 
तुम आओगी

 नैन तुम्हारे भिगेंगे
 नयनों से नींदे जब भी भागेंगी
 खुद में खो जाने का एहशास तुम्हें जब होगा
अकेले सन्नाटे से गूजरोगी
गला तुम्हारा भर आयेगा।

रात  घनी हो जायेगी
घर के मन आगन में जब कोइ आजाएगा
आहट सुनती जाओगी
एहशाह मेरा सा होगा 
एहसासो की खिड़की से जब बाहर को तुम झाकोगी
सपने को तुम तोड़ी हो मम्मी तुम्हे समझाएंगी
किस सपने का सपना बन जाने का राज तुम्हे  बताएंगी
तब तुम आओगी

जब मुझको ना तुम पाओगी 
और नींद तुम्हे ना आयेगी 
प्रगाढ़ प्रेम के यादों की गुत्थी में , 
 घुलना जब भी चाहोगी
शहर तुम्हारा पुछेगा

घर के पिछली खिड़की में परछाई भी बन जाएगी
अन्दर कंही बसा हूं खुद में जब भी ढूंढोगी 

जब खुद से खुद में घुल जाओगी
फिर भी मेरे यार , मुझे ना तुम पाओगी।

छज्जे से अंजान कोई दिख जायेगा
दूधली सी पहचान कोई दिख जाएगी
आहट मुझसा दिखलायेगा
जब भी दस्तक होगी दरवाजे पे
नन्हे पैरो से भाग वहीं तुम जाओगी पर
तुमसे अवरोध तुम्हारा आ जायेगा
नयनों से  उद्देग तुम्हारा छलकेगा

रातों को जब नींद तुम्हारी गायब होगी
सन्नाटे से अंधेरे में फोन तुम्हारा बज जायेगा
घंटो यादों से जब घिर जाओगी
मेरा नाम  सामने यूं आ जायेगा

लांखो समझाने पर तुमको समझ तो कुछ भी ना आ पाएगा
तुमने किसको छोड़ा है यह बात तुम्हारे नयनों से पलकों तक रह जाएगी
तुम चिखोगी चिल्लाओगे पर यह मौन व्यथा kise सुनाने जाओगी
आना तो तुम चाहोगी पर मै ना तुम्हे बुलाऊंगा
आना तो तुम चाहोगी ,तब तुम ना आ पाओगी

याद करोगी खुद को जब।  ना जाने क्या से क्या बन जाओगी
फरेब तुम्हारी दुनिया होगी,मखलुख  ।
  तुम्हारी झूठी होगी,
किस किस को प्रिये सताओगी
उस दिन तुमको सबकुछ  दिख जायेगा
क्या इस किस्से  का अंत कंही छुप पायेगा
किसी के सपने का कुछ हिस्सा अपना सा होगा

Liberty  पर speech सुनाता कोई दिख जाएगा
याद करोगी मुझको पर तब तक दिन ढल जाएगा
पूरी रात समझने वाला कोई निश्चल प्रेमी ना मिल पाएगा
नदिया होंगी पर झुरमुट वीरान दिखाई देगा
 
प्रेम परवाह तो होगा पर तुम्हारा उपवन वीरान दिखाई देगा
याद करोगी हर दिन ,फिर भी तुम्हारा आंगन सुनसान दिखाई देगा
आना तो तुम चाहोगी पर मै ना तुम्हे बुलाऊंगा

सलीनाता भरी लफानियत किस किस को सुनाने जाओगी
जिसमे तुम अनुरागी होगी ,मौन प्रेम सा भागी
प्रेम सदा से होगा, ख्वाबों में भी  प्रेमी ना तुम पाओगी
याद तुम्हे तब भी सब कुछ होगा पर ,
यादों के स्लेटों पर पानी तुम्हीं फिराओगी
आना तो तुम चाहोगी पर मै ना तुम्हे बुलाऊंगा

5 Dec 2020

3. route

ना जाने क्यूं तुमको नारी बनाया जाएगा
शक्ति दुर्गा ना जाने  किस किस से नवाजा जायेगा

हक तुम्हारा तुमसे छुपाने की हर संभव कोशिश की जाएगी
पर देखना सब कुछ होकर भी दरिंदगी तुम पर ही आजमाई जाएंगी

तुम्हारे तलवों से सीराने तक एक दीवार बनाई जाएगी
उस दीवार की निव में दफन होंगे तुम्हारे सपने

जो तुम्हे उणा  सकते हैं एक आज़ाद चिड़िया की तरह
उन पंखों को कुतरने की हर संभव कोशिश की जाएगी



जिससे तुम  भरना चाहती हो   कप्लना की उड़ान
एक दीवार छद्म दीवार जो ना कभी दिखलाई जाएगी
तुम्हारी सालीनटा, सहजता, आबरू उसकी नींव होंगी
मर्यादाओं और संवेदनाओं के दो पिलर बनाए जाएंगे

समरसता तुम्हारी आंखों में होगी, हया से उस दीवार की ताजें सजाई जाएंगी
लोक लाज और मौन तुम्हारा ,  छत की मोटी ढाल बनेगी

तुम्हारी ऊंची आवाज़ें दीवारों में दरारें बना सकती हैं
वो सर्ट भी  बाशर्ट तुमसे पूछी जाएगी
कुछ बिना तुम्हारे हक का ध्यान दिए फैसले का विषय बताएंगी औरकुछ  तो तुम्हारे अस्तित्व पर ही सवाल उठांयेगी
किस्से कब कितना कहना सुनना है सबकुछ  नापा तौला जायेगा

तुमको समझाने में लोक लाज़ के किस्से तुम्हे सुनाए जाएंगे 
 कहने को तुम आज़ाद हो तुमसे 
 कंगन कभी बुर्का तुम्हे पहनाया जायेगा  

ज़रा बताना को शख्स कौन था
जिसने तुम्हे आजादी दी
और मुझे कैद रहना शिखा दिया 
वो कौन था 

जिसने तुम्हे इल्म बख़्शे मुझे जाहिल बना गया
ज़रा बताना वो शख्स कौन था 
जिसने तुम्हे तकरीरों बक्शी  मुझे गैर मुद्दाकी कर गया 


ज़रा बताना वो शख्स कौन था, 
उसने तुम्हे पूरी दुनिया बक्शी मुझे किराए का मेहमान कर गया
 क्या तुम उससे कभी पुछना नही चाहोगी 
 
ऐसे तरीकों, तकरीरों को ना समझ जाए तो
इल्मो अफसानो को ना माना जाए तो क्या

तुमपे अफसाने ना लिखे जाएं तो क्या
तुमको दहलीज़ों में ना बाधा जाए तो क्या
तुमको बातों से ना परखा जाए तो क्या
तुम्हारे मूवमेंट से  चरित्र ना भापा जाए तो क्या
 

15 Nov 2020

4. deligence of wind

मैं गीता तू कुरआन 
महफिल भरा समान 

तुम शाहिल किनारों के नाम
मै गीत गजल दर्द अभी राम
गीत गजल तरनम हज़ार
तुम साख सुर्ख सजावात बनी बेमिसाल
तुम खुली मॉडलिंग किताब

में गीत पावन सुभा के नाम
तुम निशा के रुकने का अंजाम

तुम नप जाती है अंगो के अंगिकार  से
में मर जाऊं सपनों के स्वीकार से
तुम अधरो पे समाती नहीं
में पलके मुडकर भी भूलाता नहीं
तुम रागिनी हो चमेली के फुलोंसी

मै तेरे सजदे पे सर झुकाता हूं
तुम नयनों से बिस्तर सजाती हो
मैं सपनों सा ओझल हो जाता हूं
तुम सिमटती हो बाहों में
मै यही तकिए से तुझमें खो जाता हूं
तुम खयालों की दरिया बहाती हो
मै बुदो सा उड़ जाता हूं   

तुम गजलों के बहर सी इठलाती हो
मै तुकबंदी की गीता बनाता हूं
तुम मद्धम मधम गीतों में साज सजाती  हो
में हौसले सा गूंज जाता हूं
 तुम सुभा के लाली सी इठलाती हो
 मैं किरणों में धूमिल हो जाता हूं
 तुम घटाओं की लहरों में हवा सी टकराती हो
  मैं चांद की चांदनी में घूलकर घाटों को चूम जाता हूं
 तुम जो लहरा के पानी में उतरती हो
 मै मछलियों सा फिसल जाता हूं
तुम जो गलियों के चक्कर लगाती हो
मै खिड़की  से देखकर शर्माता हूं

तुम बंदिशे जब भी लगाती हो
मै आशियाना भूल जाता हूं

तुम बहती हुई ग़ज़लों के कलाम सी
तुम हो बहर तुम गीत गजाल अशमानसी

शाए कि चाव में,पायलों वाले पाव में
बहती बायार सी, 
तुम हो हवाओं के नाम

मलिन छूंध शहमा सा रहमान
तुम घरानों के ग़ज़लों में पीरोई जाती हो 
मैं तबले का स्याही मैदान सा
शामो का सजाने वाली
मै एक परिंदा नादान सा

28 Sept 2020

5. poetry aur chay

Ye shaahar lucknow hai 
 Mere mej par rakhi ek kitab hai 
Kitaab ke theek paas Chay ka ek gilash hai 

Jo ish shagar ki madhoshi aur mere Bekhayaali ka bas ek samaan hai 
 Ya yun kaho naye shahar ka ye bhi mera ek intezaam hai 


 Baitha hun yun be akli se jaise naa koi hisaab hai 
 Dafn hain inhi kitabon me kai khwaab jaise mere vajood pe hi swaal hai..

 Sochta hun ki so jaaun be fikr sunade koi daastan kahe mat man inki ye toh bs ek kwaab bekhayaal hai 

 Ye jimmewariyon ka bojh mujpe bdhta ja rha hai
 halka hun mei inme dabta ja rha hu. 
 
Ye baaten smjha sako toh bta do mujhe,
mei kah sakun yeh toh kuch bhi nahi sbkuch toh bs ek ittefaak hai.

 Iss shahar naam lucknow kun hain jab naahi koi nawaab hai. 
 Dosti aur dushmani ka yahi toh ek jvaab hai 
 Tab bhi ek chaay thi ab bhi ek chaay hai 


Ye rakhi jo kitaab hai usme bhi chaay ka zikr beshumaar hai 
 Kitaab me samandar yaa chaay hi kitaab hai

 Sahar toh lucknow hai kun nahin koi nawaaab hai.

25 Sept 2020

6. bezaan

मैं तेरे सामने हूं मगर मेरे खयाल तेरे रूबरू होने में कुछ वक्त हैं दिल दिमाग याद करता है पर इसका भी गुरूर कन्हा कम है

11 Sept 2020

7. enlightend me

गजब तेरी आलोचना 
अजब तेरा वृत्तांत है
 तुम सुण्य हो ब्रह्माण्ड सा
तेरी दृष्टि मुझमें या में ही तेरा अनंत हूं
अधर के डाली में बसा मै ही कोई बिल्क्षण अंश हूं
तू एक दृष्टि है में ही क्षुब्दांश हूं
तू एक शास्त्र में तेरा सिद्धांत हूं
तू एक देश है में ही तेरा अक्षांश हूं
तुम योगी बनाओ मै हि तेरे तप का समान हूं
तुम  शहस्ट्र  हो मैं ही तेरा रक्त् का संचार हूं
तुम प्रशफुटन ज्वार सा में तेरा चांद का अंजाम हूं
तुम गायन गीत हो  मैं मौन निशब्द सा उपन्यास हूं

8. एक सवाल सिस्टम से

क्यूं ना बादलों को पकड़ा जाए,

आसमानों में बाधा जाए,
हवाओं को मोड़ा जाए  ,
सवाल बेख्याल हो कर किया जाए
,
आज एक सवाल उनसे कम ना पूछा जाए,
चलिए एक घूंट गम का यूंही लिया जाए

जो हमारी सांसों के जबरदस्ती मालिकान हैं,
हावाओं के मुख मोड़ने वाले खुदी में ताजदार है
चलिए आइना ही बना जाए,
जिनके हम और तुम बिन कहे कर्जदार हैं
मुश्किल है पर ,
क्यूं ना आज सिस्टम से ही सवाल पूछा जाए

इस ख़ामोशी को तोड से ऐसी एक आवाज़ लाई जाए

चट्टानों से ही सही कुछ 

बात बोली जाए
बात हमेशा पते कि हो ऐसा क्यूं

कुछ सवाल के पेट के लिए ही पूछा जाए

इन्हें  मक्कारी या फिर बेईमानी  हि समझा जाए

सवाल डरकर ही सही मसनदे आका से क्यूं ना किया जाए


आसान नहीं था खुद को भी तो समझाना
 न्याय नहीं था चट्टानों से बातें करना


आसान नहीं था भावनाओं का समेटा जाना
हुज़ूर से आगे निकला जाए
हुकूमत का हुक्म ना माना जाएं

तो क्या मुझे बर्बाद कर दिया जाएगा
मेरे आशियाने को तबाह कर दिया जाएगा
तो क्या मुझे गैर मजहबी मांन लिया जाएगा
तो  क्या मुझे दरकिनार कर दिया जाएगा
तो क्या मेरे सवालों को मेरे साथ नाजायज कह दिया जाएगा

9. bandish

अंधेरों के अधेड़ बुन में मैं ना जाने 
क्यूं उलझा हुआ पाता हूं खुद को,
 तेरे वजुहाद की कभी कद्र करता हूं 
 कभी इस जमाने का कैद परिंदा बन जाता हू