2 Mar 2021

LOCKDOWN

शर्मिंदा शहर हुआ है।।। 
आंख नम   सिर्फ तुम्हारी क्यूँ  है 
जब बेनकाब पूरा जामाना है
में ज़िंदा लाश नहीं हूं
तुम्हारे सिस्टम कि तरह

नेता सत्ता,मुजलिम मुजालीम से दूर है 
तुम्हारी बेबसी की तरह 

कोइ चिराग चल रहा है भले ही वो सन्नाटे
से कन्ही दूर खड़ा है

एक चिराग काफी है सोए हुए जमाने को
नूर दिखाने के लिए
आफताब कि तरह

पाव में चप्पल  नहीं  पर , ये कर रहे  कूच ऐलानहै
 मांझी के गुरूर कि तरह

  उनके होठों से पूछो गले तक जवाब दे रहे हैं
  टूट कर,बिखर कर बस एक माशिहा का इंतजार कर रहे हैं
  मजलूमों की तरह

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