11 Sept 2020

9. bandish

अंधेरों के अधेड़ बुन में मैं ना जाने 
क्यूं उलझा हुआ पाता हूं खुद को,
 तेरे वजुहाद की कभी कद्र करता हूं 
 कभी इस जमाने का कैद परिंदा बन जाता हू

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