गजब तेरी आलोचना
अजब तेरा वृत्तांत है
तुम सुण्य हो ब्रह्माण्ड सा
तेरी दृष्टि मुझमें या में ही तेरा अनंत हूं
अधर के डाली में बसा मै ही कोई बिल्क्षण अंश हूं
तू एक दृष्टि है में ही क्षुब्दांश हूं
तू एक शास्त्र में तेरा सिद्धांत हूं
तू एक देश है में ही तेरा अक्षांश हूं
तुम योगी बनाओ मै हि तेरे तप का समान हूं
तुम शहस्ट्र हो मैं ही तेरा रक्त् का संचार हूं
तुम प्रशफुटन ज्वार सा में तेरा चांद का अंजाम हूं
तुम गायन गीत हो मैं मौन निशब्द सा उपन्यास हूं
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