ना जाने क्यूं तुमको नारी बनाया जाएगा
शक्ति दुर्गा ना जाने किस किस से नवाजा जायेगा
हक तुम्हारा तुमसे छुपाने की हर संभव कोशिश की जाएगी
पर देखना सब कुछ होकर भी दरिंदगी तुम पर ही आजमाई जाएंगी
तुम्हारे तलवों से सीराने तक एक दीवार बनाई जाएगी
उस दीवार की निव में दफन होंगे तुम्हारे सपने
जो तुम्हे उणा सकते हैं एक आज़ाद चिड़िया की तरह
उन पंखों को कुतरने की हर संभव कोशिश की जाएगी
जिससे तुम भरना चाहती हो कप्लना की उड़ान
एक दीवार छद्म दीवार जो ना कभी दिखलाई जाएगी
तुम्हारी सालीनटा, सहजता, आबरू उसकी नींव होंगी
मर्यादाओं और संवेदनाओं के दो पिलर बनाए जाएंगे
समरसता तुम्हारी आंखों में होगी, हया से उस दीवार की ताजें सजाई जाएंगी
लोक लाज और मौन तुम्हारा , छत की मोटी ढाल बनेगी
तुम्हारी ऊंची आवाज़ें दीवारों में दरारें बना सकती हैं
वो सर्ट भी बाशर्ट तुमसे पूछी जाएगी
कुछ बिना तुम्हारे हक का ध्यान दिए फैसले का विषय बताएंगी औरकुछ तो तुम्हारे अस्तित्व पर ही सवाल उठांयेगी
किस्से कब कितना कहना सुनना है सबकुछ नापा तौला जायेगा
तुमको समझाने में लोक लाज़ के किस्से तुम्हे सुनाए जाएंगे
कहने को तुम आज़ाद हो तुमसे
कंगन कभी बुर्का तुम्हे पहनाया जायेगा
ज़रा बताना को शख्स कौन था
जिसने तुम्हे आजादी दी
और मुझे कैद रहना शिखा दिया
वो कौन था
जिसने तुम्हे इल्म बख़्शे मुझे जाहिल बना गया
ज़रा बताना वो शख्स कौन था
जिसने तुम्हे तकरीरों बक्शी मुझे गैर मुद्दाकी कर गया
ज़रा बताना वो शख्स कौन था,
उसने तुम्हे पूरी दुनिया बक्शी मुझे किराए का मेहमान कर गया
क्या तुम उससे कभी पुछना नही चाहोगी
ऐसे तरीकों, तकरीरों को ना समझ जाए तो
इल्मो अफसानो को ना माना जाए तो क्या
तुमपे अफसाने ना लिखे जाएं तो क्या
तुमको दहलीज़ों में ना बाधा जाए तो क्या
तुमको बातों से ना परखा जाए तो क्या
तुम्हारे मूवमेंट से चरित्र ना भापा जाए तो क्या