मैं गीता तू कुरआन
महफिल भरा समान
तुम शाहिल किनारों के नाम
मै गीत गजल दर्द अभी राम
गीत गजल तरनम हज़ार
तुम साख सुर्ख सजावात बनी बेमिसाल
तुम खुली मॉडलिंग किताब
में गीत पावन सुभा के नाम
तुम निशा के रुकने का अंजाम
तुम नप जाती है अंगो के अंगिकार से
में मर जाऊं सपनों के स्वीकार से
तुम अधरो पे समाती नहीं
में पलके मुडकर भी भूलाता नहीं
तुम रागिनी हो चमेली के फुलोंसी
मै तेरे सजदे पे सर झुकाता हूं
तुम नयनों से बिस्तर सजाती हो
मैं सपनों सा ओझल हो जाता हूं
तुम सिमटती हो बाहों में
मै यही तकिए से तुझमें खो जाता हूं
तुम खयालों की दरिया बहाती हो
मै बुदो सा उड़ जाता हूं
तुम गजलों के बहर सी इठलाती हो
मै तुकबंदी की गीता बनाता हूं
तुम मद्धम मधम गीतों में साज सजाती हो
में हौसले सा गूंज जाता हूं
तुम सुभा के लाली सी इठलाती हो
मैं किरणों में धूमिल हो जाता हूं
तुम घटाओं की लहरों में हवा सी टकराती हो
मैं चांद की चांदनी में घूलकर घाटों को चूम जाता हूं
तुम जो लहरा के पानी में उतरती हो
मै मछलियों सा फिसल जाता हूं
तुम जो गलियों के चक्कर लगाती हो
मै खिड़की से देखकर शर्माता हूं
तुम बंदिशे जब भी लगाती हो
मै आशियाना भूल जाता हूं
तुम बहती हुई ग़ज़लों के कलाम सी
तुम हो बहर तुम गीत गजाल अशमानसी
शाए कि चाव में,पायलों वाले पाव में
बहती बायार सी,
तुम हो हवाओं के नाम
मलिन छूंध शहमा सा रहमान
तुम घरानों के ग़ज़लों में पीरोई जाती हो
मैं तबले का स्याही मैदान सा
शामो का सजाने वाली
मै एक परिंदा नादान सा